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उत्तराखंड का प्रागैतिहासिक काल 

उत्तराखंड का प्रागैतिहासिक काल 

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उत्तराखंड का प्रागैतिहासिक काल 

उत्तराखंड का प्रागैतिहासिक काल 
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प्रागैतिहासिक काल का अभिप्राय उस कालखंड से है, जिसमें मनुष्य को लिखित साक्ष्य की प्राप्ति नहीं होती,  praghtihask  काल कहते है।

 

उत्तराखंड राज्य में बहुत स्थान पर भाषण कल के उपकरण गुफा चित्र शैली कंकाल और धातु के उपकरण प्राप्त हुए हैं। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि उत्तराखंड में प्रागैतिहासिक काल अपने उच्च चरण में था।

प्रागैतिहासिक काल में उत्तराखंड में अनेको  साक्ष्यों की प्राप्ति हुई है जो निम्नलिखित  है।

लाखु गुफा:-

सन 1963में लाखु अर्थात गुफा की खोज महेश्वर प्रसाद जोशी(M P) जोशी  ने की  थी। जो अल्मोड़ा के बाड़े छीना के दल बैंड के पास स्थित है। यहां पर मानव और पशुओं के सेल चित्र प्राप्त हुए हैं, जिनको रंगों से सजाया गया है।

ग्वारखा गुफा :- 

 उत्तराखंड के चमोली जिले में डुमरी गांव के पास अलकनंदा नदी घाटी में स्थित एक गुफा मिली है।जिसे पाषाण कालीन गुफा भी कहते हैं।

इस गुफा की खोज 1993 में राकेश भट्ट के द्वारा की गई थी। यह स्थान गोपेश्वर से 12 किलोमीटर दूर स्थित है। यदि हम डुंगरी गांव  से 1.5 किलोमीटर की ट्रैकिंग पर अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है। यहां पर पीले रंग का प्रयोग हुआ है जिसमें लाल और गुलाबी रंग के लगभग 41 रंगीन चित्र मिले हैं। इसमें मानव, बारहसिंगा, बकरी,  लोमड़ी आदि के शैल चित्र शामिल है। मुख्य रूप से इन चित्रों में पशुओं को घेरा बनाकर या भगाते हुए दर्शाया गया है।

किमनी गांव:- 

इस गांव की खोज सन 1998 में डॉक्टर एमपी जोशी ने की थी यह चमोली जनपद में थराली के निकट पिंडदान नदी घाटी में स्थित है। यहां पर हल्के सफेद रंग के चित्रित हथियारों एवं पशुओं के शैल चित्रों की प्राप्ति हुई हैं। अभी तक यह एक ऐसा स्थल है जहां पर काले रंग का प्रयोग हुआ है यहां पर एक आलेख प्राप्त हुआ है। जो लगभग विलुप्त हो चुका है जिस कारण कल है डॉक्टर यशोधर मतपाल के अनुसार यह आलेख लगभग 2100 से 1400 वर्ष पुराना है। तथा शंख लिपि में लिखा गया है। संकल्प वह लिपि है जिसको अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है।

लेवेथाप गुफा:-

यह गुफा दीपा पानी से लगभग 3 किलोमीटर दूर अल्मोड़ा में स्थित है। यहां से लाल रंग के चित्र शैली चित्र प्राप्त हैं। लेवेथाप गुफा का अभिप्राय लाल रक्त चित्र को माना जाता है। सेल चित्रों में मानव को शिकार करते तथा हाथों में हाथ डालकर नृत्य करते हुए दिखाई दिखाया गया है। अल्मोड़ा जनपद के सहायता से सामान्य स्थल कोटि के माने जाते हैं यहां से पूर्वी क्षेत्र की ओर गुफा का दृश्य देता है डॉक्टर यशोधर मतपाल के अनुसार इससे यह संभावना व्यक्त की गई है कि लैविटत और लाखों गुफा के निवासी कभी आपस में संपर्क में नहीं रहते होंगे।

पेटशाल:-

यह गुफा अल्मोड़ा में स्थित है इसकी खोज डॉक्टर यशोधर मतपाल ने सन 1989 में की थी यहां से कठे रंग के मानव आकृतियां प्राप्त हुई है।

यह स्थल सुयाल नदी के प्रवाह क्षेत्र में स्थित है।

फल सीमा:-

यह गुफा अल्मोड़ा में स्थित है यहां से योग नृत्य आकृतियां प्राप्त हुई है। फल सीमा में दो चट्टानें हैं, जिस पर दो कप मार्क बने हुए हैं।

हुडली गुफा:-

यह गुफा उत्तरकाशी में स्थित है यहां से नीले रंग के शैल चित्रों की प्राप्ति हुई है। हुडली के सेल चित्रों में नीले रंग का विशेष कर प्रयोग उल्लेखनीय है। यहां से काले रंग में शंख लिपि का एक लेख भी प्राप्त हुआ है।

Faq Questions

प्रश्न 1. प्रागैतिहासिक काल का क्या अभिप्राय है?

उत्तर: प्रागैतिहासिक काल उस समय को कहा जाता है, जिसके बारे में जानकारी देने वाले लिखित साक्ष्य उपलब्ध नहीं होते। इस काल का अध्ययन पुरातात्त्विक अवशेषों, पत्थर के औजारों, गुफाओं, शैलचित्रों और अन्य भौतिक साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है।

प्रश्न 2. उत्तराखंड में प्रागैतिहासिक काल के कौन-कौन से साक्ष्य मिले हैं?

उत्तर: उत्तराखंड में प्रागैतिहासिक काल से संबंधित शैलचित्र, गुफाएँ, पत्थर के औजार, मानव एवं पशुओं की आकृतियाँ तथा अन्य पुरातात्त्विक साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।

प्रश्न 3. शैलचित्र किसे कहते हैं?

उत्तर: चट्टानों या गुफाओं की सतह पर प्राकृतिक रंगों से बनाई गई मानव, पशु, शिकार तथा नृत्य जैसी आकृतियों को शैलचित्र कहा जाता है।

प्रश्न 4. प्रागैतिहासिक काल के अध्ययन में शैलचित्रों का क्या महत्त्व है?

उत्तर: शैलचित्रों से प्राचीन मानव के जीवन, शिकार, सामाजिक गतिविधियों, कलात्मक अभिव्यक्ति और प्रकृति के साथ उसके संबंधों के बारे में जानकारी मिलती है।

प्रश्न 5. लाखु गुफा कहाँ स्थित है?

उत्तर: लाखु गुफा उत्तराखंड के अल्मोड़ा जनपद में बाड़ेछीना के निकट दल बैंड क्षेत्र में स्थित है।

प्रश्न 6. लाखु गुफा की खोज किसने की थी?

उत्तर:  लाखु गुफा की खोज वर्ष 1963 में डॉ. महेश्वर प्रसाद जोशी (एम.पी. जोशी) ने की थी।

प्रश्न 7. लाखु गुफा से किस प्रकार के शैलचित्र प्राप्त हुए हैं?

उत्तर: प्रागैतिहासिक काल उस समय को कहा जाता है, जिसके बारे में जानकारी देने वाले लिखित साक्ष्य उपलब्ध नहीं होते। इस काल का अध्ययन पुरातात्त्विक अवशेषों, पत्थर के औजारों, गुफाओं, शैलचित्रों और अन्य भौतिक साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है।

प्रश्न 8. उत्तराखंड में प्रागैतिहासिक काल के कौन-कौन से साक्ष्य मिले हैं?

उत्तर: उत्तराखंड में प्रागैतिहासिक काल से संबंधित शैलचित्र, गुफाएँ, पत्थर के औजार, मानव एवं पशुओं की आकृतियाँ तथा अन्य पुरातात्त्विक साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।

प्रश्न 9. शैलचित्र किसे कहते हैं?

उत्तर: चट्टानों या गुफाओं की सतह पर प्राकृतिक रंगों से बनाई गई मानव, पशु, शिकार तथा नृत्य जैसी आकृतियों को शैलचित्र कहा जाता है।

प्रश्न 10. प्रागैतिहासिक काल के अध्ययन में शैलचित्रों का क्या महत्त्व है?

उत्तर: शैलचित्रों से प्राचीन मानव के जीवन, शिकार, सामाजिक गतिविधियों, कलात्मक अभिव्यक्ति और प्रकृति के साथ उसके संबंधों के बारे में जानकारी मिलती है।

प्रश्न 11. ग्वारखा गुफा में किस रंग के शैलचित्र पाए गए हैं?

उत्तर: दिए गए विवरण के अनुसार, यहाँ पीले, लाल और गुलाबी रंगों के शैलचित्र पाए गए हैं।

प्रश्न 12. ग्वारखा गुफा के शैलचित्रों में किन पशुओं को दर्शाया गया है?

उत्तर: यहाँ मानव के अतिरिक्त बारहसिंगा, बकरी और लोमड़ी जैसे पशुओं की आकृतियाँ बताई गई हैं।

प्रश्न 13. ग्वारखा गुफा के चित्रों में पशुओं की गतिविधियों को किस प्रकार दर्शाया गया है?

उत्तर: आपके नोट्स के अनुसार, चित्रों में पशुओं को घेरने या भगाने जैसी गतिविधियाँ दिखाई गई हैं।

प्रश्न 14. ग्वारखा गुफा गोपेश्वर से लगभग कितनी दूर स्थित है?

उत्तर: दिए गए नोट्स के अनुसार, यह गोपेश्वर से लगभग 12 किलोमीटर दूर है।

प्रश्न 15. किमनी गाँव उत्तराखंड के किस जनपद में स्थित है?

उत्तर: किमनी गाँव चमोली जनपद में थराली के निकट पिंडर नदी घाटी क्षेत्र में स्थित है।

प्रश्न 16. किमनी के शैलचित्रों की खोज किसने की थी?

उत्तर: आपके नोट्स के अनुसार, वर्ष 1998 में डॉ. एम.पी. जोशी ने इस स्थल की खोज की थी।

प्रश्न 17. किमनी गाँव से किस प्रकार के शैलचित्र प्राप्त हुए हैं?

उत्तर: यहाँ हल्के सफेद रंग में चित्रित हथियारों और पशुओं की आकृतियाँ प्राप्त होने का उल्लेख है।

प्रश्न 18. किमनी गाँव के शैलचित्रों की एक विशेषता क्या है?

उत्तर: दिए गए नोट्स में यहाँ काले रंग के प्रयोग का उल्लेख किया गया है।

प्रश्न 19. किमनी गाँव से प्राप्त अभिलेख किस लिपि में लिखा बताया गया है?

उत्तर: शंख लिपि में लिखा एक अभिलेख प्राप्त हुआ है।

प्रश्न 20. किमनी के अभिलेख की अनुमानित आयु कितनी बताई गई है?

उत्तर: आपके नोट्स में डॉ. यशोधर मठपाल के मत के अनुसार इसकी आयु लगभग 2,100 से 1,400 वर्ष पुरानी बताई गई है। इस तिथि और अभिलेख की पहचान को परीक्षा में उपयोग करने से पहले किसी विश्वसनीय पुरातात्त्विक स्रोत से सत्यापित करना उचित होगा।

प्रश्न 21. ल्वेथाप गुफा कहाँ स्थित है?

उत्तर: ल्वेथाप गुफा अल्मोड़ा के निकट स्थित बताई गई है।

प्रश्न 22. ल्वेथाप गुफा से किस रंग के शैलचित्र प्राप्त हुए हैं?

उत्तर: यहाँ लाल रंग के शैलचित्र प्राप्त होने का उल्लेख है।

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